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Alka Ranjan

Tragedy Inspirational

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Alka Ranjan

Tragedy Inspirational

खोती अस्तित्व बेटियां

खोती अस्तित्व बेटियां

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कहानी असिफा की हो या हो निर्भया

कैसे ना रोए सुनकर यह दिल यहां 

ना थी वह हिंदू न मुल्ला 

थी वह बस इस देश की बिटिया 

हुआ क्या है इस समाज को 

क्यों नरभक्षी बना इंसान यहां

बात न धर्म की न नाम की 

हो फातिमा या गीता,

है कौन सुरक्षित यहां

हर हाल में होता स्त्री का भक्षण यहां

दरिंदगी की हो गई हद पार यहां 

छोटी नन्ही कलियां भी नहीं महफूज यहां

राजनीति और न्याय भी है खामोश जहां

होगा क्या खाक कल्याण जन-जन का यहां 

होगी अतिशयोक्ति न ....

अगर कहूं जाने कब आ जाए अपनी बारी यहां


ना हिंदू की न मुसलमान की

 न तेरी है ना मेरी 

यह लड़ाई है इस देश की बेटी की

इस पुरुष प्रधान समाज से

बन कर बैठे जो ठेकेदार यहां

खो रही वर्चस्व स्त्रीत्व की 

एक तरफ है कहीं पूजी जाती 

तो दूजे पल रौंदी

है जग इस दोगले समाज का

जो आज मिलकर ना बोली तुम सखी 

खो जायेगा अस्तित्व तेरा

 मंदिरों में तो होगी पर वास्तविक ना नजर आएगी फिर तू कहीं !!


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