कहां गए गजरे
कहां गए गजरे
वह बालों के गजरे कहां गए?
हमारे जमाने शायद गुजर गए।
कितना अच्छा लगता था
जब जूड़े पर गजरा लगता था।
भले ही लहराती केश राशि हो।
पर गजरे से तो पीछे ही रह जाती थी वह।
फूलों से ढका हुआ मुखडे का दिखना।
बादल से फैले बालों का उड़ना।
मदमस्त सुगंध का पूरे घर में बहना।
एक सरूर सा दिन रात था रहना।
उनका गजरे को घर लेकर आना।
छिप कर देना और मुस्काना।
संयुक्त परिवार में सबसे नजरे चुराना।
और उनकी नजर में हमारा खास बन जाना।
आज कहां है वह जमाना?
नकली भाव, नकली चेहरा,
नकली खुशबू, नकली मुस्काना
आज असल का नहीं जमाना।

