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Sadhana Mishra samishra

Tragedy

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Sadhana Mishra samishra

Tragedy

कौन कहता है

कौन कहता है

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कौन कहता है कि गिद्ध लुप्त हो गए हैं

जीवित लाशों को नोंचने, रूप बदल लिए हैं।

कूद रहीं अंधकूप में, पापा की परियां

असहाय से देखते, मां -बाप खड़े हुए हैं।


विश्वास करके कभी, घर न लाना किसी को

विश्वास घाती ही अब, मित्र बने हुए हैं।

टूटल मनवा जोड़ू कइसे, टूटी आस की डोर

गिद्धों का समाज जुटल बा, खाये नोंच-नोंच।


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