Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Sadhana Mishra samishra

Abstract


2  

Sadhana Mishra samishra

Abstract


अनंत यात्रा हमारी

अनंत यात्रा हमारी

1 min 307 1 min 307

अनंत यात्रा हमारी,

आज हम कहां खड़े हैं

चहुँ ओर राख ही राख,

उड़ रहे हैं।


कायरों की रखी है, 

म्यान में तलवार

तटस्थों से इतिहास,

कल पूछेगा सवाल।


अतीत से हमनें,

क्या नहीं ली है सीख

आजादी की कद्र नहीं,

क्या पाई हमनें भीख।


भेड़ों के झुंड़ निकल रहे,

सड़कों पर डराने को

काफी है बस एक,

सिंह की दहाड़।


वणिकों की बुद्धि से,

करो न तुम व्यवहार

वरना कल पूछ ही लेगा,

कहाँ तुम्हारा हिंदुस्तान ?


Rate this content
Log in

More hindi poem from Sadhana Mishra samishra

Similar hindi poem from Abstract