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Paramita Sarangi

Romance

4  

Paramita Sarangi

Romance

काश !

काश !

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90

मैने तो प्यार का इजहार 

किया था

अच्छा होता तुम मान लेते

दवे पाँव तुम्हारे कमरे तक

आइ थी


काश ! तुम दरवाजा खोल देते

तुम्हारे यादों से महकती 

बदन मेरी


काश !वो खुशबु पहचान लेते

मैं तो तन्हा अब चलने लगी

ये मेरी हमसफर

काश ! वो आहट तुम सुन लेते।


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