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Kanchan Prabha

Drama Romance Fantasy


4.7  

Kanchan Prabha

Drama Romance Fantasy


काँच की चाँदनी

काँच की चाँदनी

1 min 334 1 min 334

रात उजली सी थी थोड़ी धुँधली सी थी

क्या कहूँ कि चाँदनी ये क्या कर गयी

जब आहिस्ते से आये मेरे पास वो

उनके आने की आहट बयाँ कर गई


बातें करने की ख्वाहिश कहाँ ले गई

बातों बातों में उनकी दुआ कर गई

पूछा तबीयत जो उनका तो हँस कर कहा

अपनी जिम्मेदारी खुद से अदा कर गई

क्या कहूँ कि चाँदनी ये क्या कर गई


ओस की नन्ही नन्ही बुंदे झड़ी टूट कर 

चुपके से मेरे अश्कों की दवा कर गई

बाकी बची थी चार पल की जो ख्वाहिश

उस ख्वहिशों की पूरी हवा कर गई

क्या कहूँ कि चाँदनी ये क्या कर गई


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