STORYMIRROR

AKANKSHA SHRIVASTAVA

Drama

3  

AKANKSHA SHRIVASTAVA

Drama

जुबान

जुबान

1 min
481

जुबान को तलवार बनाने वाले 

बदन पे कई औज़ार लगाए चलते हैं।

 

दूसरों को तो कभी कभी वार करते हैं 

खुद दिन में सौ बार मरा करते हैं। 


फर्क बस इतना है मौत जिस्म की नहीं

आत्मा की हुआ करती है। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama