AKANKSHA SHRIVASTAVA
Drama
जुबान को तलवार बनाने वाले
बदन पे कई औज़ार लगाए चलते हैं।
दूसरों को तो कभी कभी वार करते हैं
खुद दिन में सौ बार मरा करते हैं।
फर्क बस इतना है मौत जिस्म की नहीं
आत्मा की हुआ करती है।
सम्मान
सफर
इन अंधेरो में...
आँगन के गुलाब...
दरख़्त
दर्द के पहलु ...
जुबान
आसमान या ज़मीन...
भूख-पराए देश ...
गिर के उठना ,...
माया कभी भी छू सके न वही कराते भवसागर पार। माया कभी भी छू सके न वही कराते भवसागर पार।
भाई की ताक़त और जान हो अर्धांगिनी की साँस-पहचान हो भाई की ताक़त और जान हो अर्धांगिनी की साँस-पहचान हो
वक़्त की माँग ने ऐसा बदला इतिहास नये रोज रचती गई। वक़्त की माँग ने ऐसा बदला इतिहास नये रोज रचती गई।
मेरे साथ में दूसरे बढे़ सदा परोपकार की भावना ह्रदय रही।। मेरे साथ में दूसरे बढे़ सदा परोपकार की भावना ह्रदय रही।।
थोड़ी कहों, थोड़ी सुनों हाल-ए-दिल सुनाया करों। थोड़ी कहों, थोड़ी सुनों हाल-ए-दिल सुनाया करों।
हम तो सहरा में भी, भीगे हुए से, ही लगते हैं, तेरे हुस्न से, जलवों की, जब बौछार होती है हम तो सहरा में भी, भीगे हुए से, ही लगते हैं, तेरे हुस्न से, जलवों की, जब बौछा...
भगवान से भी गुरू मिलता जो भवसागर से दे तार।। भगवान से भी गुरू मिलता जो भवसागर से दे तार।।
भारत माँ की डूबती नैया वहीं लगाये तीर भारत माँ की डूबती नैया वहीं लगाये तीर
प्रेम की कुछ बूंदें बरसा दीजिए वायदा और विश्वास अटल देंगे प्रेम की कुछ बूंदें बरसा दीजिए वायदा और विश्वास अटल देंगे
क्या लिखूँ और कैसे लिखूँ, जब अपना परिचय न मुझको पता। क्या लिखूँ और कैसे लिखूँ, जब अपना परिचय न मुझको पता।
हार बैठी मैं सब कुछ उन पर, जब उनसे मिली थी मैं सखियाँ। हार बैठी मैं सब कुछ उन पर, जब उनसे मिली थी मैं सखियाँ।
मुट्ठी में रेत जो थामी थी, ना ठहरी तो पछताना क्या ? मुट्ठी में रेत जो थामी थी, ना ठहरी तो पछताना क्या ?
अपना-पराया भूल के सारे हिंदुतानी कहलाए सब देशवासी। अपना-पराया भूल के सारे हिंदुतानी कहलाए सब देशवासी।
जीवन में कभी समझ सके न ऐसा मीठा वार करेगा जीवन में कभी समझ सके न ऐसा मीठा वार करेगा
शत्रु भी अपने मित्र है बनते जब अपना प्रभाव दिखाते यें।। शत्रु भी अपने मित्र है बनते जब अपना प्रभाव दिखाते यें।।
सुकून, शांति मन को मिलती सखियाँ भी बनाती खूब बतियाँ।। सुकून, शांति मन को मिलती सखियाँ भी बनाती खूब बतियाँ।।
बडे़-बडे़ लछ्य छोटे पड़ते ऐसी एकता की ताकत बेजोड़। बडे़-बडे़ लछ्य छोटे पड़ते ऐसी एकता की ताकत बेजोड़।
छपाक सी मेरी जिंदगी कर दी मुझसे कैसी दुश्मनी थी। छपाक सी मेरी जिंदगी कर दी मुझसे कैसी दुश्मनी थी।
खुशी से अपना जीवन जी लों जब तक शरीर में जान है।। खुशी से अपना जीवन जी लों जब तक शरीर में जान है।।
ग्लोबल वार्मिंग बड़ा है कारण मशीनीकरण जो ज्यादा हो। ग्लोबल वार्मिंग बड़ा है कारण मशीनीकरण जो ज्यादा हो।