AKANKSHA SHRIVASTAVA
Inspirational
दरख़्तों पे दरार ही काफी है
टूट जाने के लिए,
कटना ही जरुरी नहीं है।
दरख्तों पे दरार जरुरी है
डाली को फूलों से
भर जाने के लिए।
दर्द का ज़ख़्म जरुरी है,
खुशियों का मरहम पाने के लिए
दरार तो जरुरी है,
नसीब में बहार को लेने के लिए।
सम्मान
सफर
इन अंधेरो में...
आँगन के गुलाब...
दरख़्त
दर्द के पहलु ...
जुबान
आसमान या ज़मीन...
भूख-पराए देश ...
गिर के उठना ,...
जो मात-पिता हैं पूज्य अरे ! तुम उनको क्यों ठुकराते हो। जो मात-पिता हैं पूज्य अरे ! तुम उनको क्यों ठुकराते हो।
एक कलश भर लावे पानी। राम सिया की सुनै कहानी। एक कलश भर लावे पानी। राम सिया की सुनै कहानी।
सृष्टि की रचनाकार कहूँ या संगीत की लय ताल सरिता की तरंग कहूँ या झरने की झंकार सृष्टि की रचनाकार कहूँ या संगीत की लय ताल सरिता की तरंग कहूँ या झरन...
थपेड़े सहते-सहते सहम-सा गया हूं। मौन रहते-रहते मुखरित हो रहा हूं। थपेड़े सहते-सहते सहम-सा गया हूं। मौन रहते-रहते मुखरित हो रहा हूं।
भाषा नहीं है केवल यह जन मन की अभिव्यक्ति है । भाषा नहीं है केवल यह जन मन की अभिव्यक्ति है ।
हर बदलाव की नियति से उन्हें, मिलकर परिचित करवाएं। हर बदलाव की नियति से उन्हें, मिलकर परिचित करवाएं।
चहेरे पर मुस्कान को रख कुछ नया करने की चाहत रख. चहेरे पर मुस्कान को रख कुछ नया करने की चाहत रख.
और किसी को भी उदास रहने दो। और किसी को भी उदास रहने दो।
मेरा क्या मैं कोन हूँ बन गयी। खैर यहीं सहीं में मैं हूँ। मेरा क्या मैं कोन हूँ बन गयी। खैर यहीं सहीं में मैं हूँ।
यम, शनि की बहना प्यारी श्याम रंग की सुंदरी है. यम, शनि की बहना प्यारी श्याम रंग की सुंदरी है.
चाँद तक तो पहुँच गये चांदनी निर्मल खो गए हम। चाँद तक तो पहुँच गये चांदनी निर्मल खो गए हम।
संपर्क टूटा विक्रम से तो ना समझ ये विफल रहा. संपर्क टूटा विक्रम से तो ना समझ ये विफल रहा.
किन-किन का नाम ले हिंदी में घर-घर की कहानी है। किन-किन का नाम ले हिंदी में घर-घर की कहानी है।
और खोजी है नयी मंजिलें कारण इतना ही है निरंतर पग बढ़ाते चलो। और खोजी है नयी मंजिलें कारण इतना ही है निरंतर पग बढ़ाते चलो।
कसम वहि खूने क बांधि रहे, सुनि ल हो बिरना निहारि रहे।। कसम वहि खूने क बांधि रहे, सुनि ल हो बिरना निहारि रहे।।
हिन्दुस्तानी ही करते हैं , हिन्दी कहने में आनाकानी। हिन्दुस्तानी ही करते हैं , हिन्दी कहने में आनाकानी।
रात दिन की मेहनत से एक पहचान बनाई है धैर्य और विश्वास से हर राह आसान बनाई हैं। रात दिन की मेहनत से एक पहचान बनाई है धैर्य और विश्वास से हर राह आसान बनाई है...
हाय हेलो छोड़ दो मित्रों भीड़ में नहीं अब जाना हो. हाय हेलो छोड़ दो मित्रों भीड़ में नहीं अब जाना हो.
ना मैं हिन्दू ना मैं मुस्लिम मैं हिंदुस्तान की जनता हूँ। ना मैं हिन्दू ना मैं मुस्लिम मैं हिंदुस्तान की जनता हूँ।
पंख फैलाओ, फड़फ़ड़ाओ, उड़ जाओ, खोजो ! उम्मीद नया आसमान नई। पंख फैलाओ, फड़फ़ड़ाओ, उड़ जाओ, खोजो ! उम्मीद नया आसमान नई।