STORYMIRROR

Madhu Gupta "अपराजिता"

Classics Fantasy Inspirational

4  

Madhu Gupta "अपराजिता"

Classics Fantasy Inspirational

ज़िंदगी को किनारा मिल गया

ज़िंदगी को किनारा मिल गया

1 min
260

जिंदगी को किनारा मिल गया, देखो एक बार फिर से जीने का बहाना मिल गया।

अंधेरे में बंद होती पलकों को, चरागों का उजाला मिल गया।। 


साथ सब के संग चलने का मुझे, फिर एक सहारा मिल गया।

हसरतों से भरा मुझको, एक नादान परिंदा फड़फड़ाता मिल गया।। 


बड़ा दिलचस्प है ये मंजर, ख्वाइशों से भरा है ये दिल का जंगल।।

ख्वाहिशों से भरे दिल में, मुझको जुगनू सा चमकता एक सितारा मिल गया।। 


मंदिर की सीढ़ी बैठा मासूम सा एक बच्चा, आंखें मूंदे दुआ मांगता। 

ये देख कर मेरे अंदर का मासूम बच्चा, मुझमें विश्वास जगाता हुआ मिल गया।। 


बड़ा नमकीन था आंखों का पानी, जब देखा समंदर को बहते। 

तब आंखों का वो नमकीन पानी, शरबतों सा मेरे अंदर घुल गया।। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics