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S N Sharma

Romance

4  

S N Sharma

Romance

जब जब तेरी याद आई

जब जब तेरी याद आई

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जब जब तेरी याद आई आंख देखने को तरसी।

आंखों से पीड़ा की बदली घनी भूत होकर बरसी।

विस्तृत नभ के कोने में सजा चांद सा रूप तुम्हारा।

उल्फत के दुश्मन बादल छुपा सके ना तेरा नजारा।

तन मन को महका जाती है प्रीत पवन के झोंके सी

आंखों से पीड़ा की बदली घनी भूत होकर बरसी।

रस्म रिवाजों की महफिल है दुनिया आनी जानी है

प्रीत और अवरोधों से ही बनती हर नई कहानी है।

रात कुमुदिनी खिली रही चाह रही थी मधुकर की

आंखों से पीड़ा की बदली घनी भूत होकर बरसी।



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