इज़हार ए इश्क़
इज़हार ए इश्क़
प्रियतमा बड़ी अजीब हैं तेरे मेरे दिल की कहानी,
जब भी तुझे देखूँ तू हमेशा आक्रोश में नज़र आती,
पर गुलाब की कलियाँ खिलती मन में मेरे तुझे देखते ही।।
माना तुम खूबसूरत पात्र हो दास्ताँ-ए -इश्क़ की,
ऋतिक रोशन तो नहीं पर उतने बुरे नहीं हम भी,
गुज़ारिश है तुमसे कभी एक नज़र देख लो हमें भी।।
दक्षिण की प्रसिद्ध नायिका की तरह तुम हमें लगती,
तो लुंगी पहने क्या वहाँ के नायक को नहीं जानती!
या फिर मुझे तड़पाने के लिये स्वांग तुम हो कर रही।
अब सहा नहीं जाता अंतिम बार लगा रहे है अर्ज़ी,
पावन-प्रेम करते तुमसे, मोहब्बत नहीं हमारी फ़र्ज़ी,
जा रहे है दूर तुमसे, बुलाना या ना बुलाना तुम्हारी मर्ज़ी।

