इतनी मोहलत तो दे
इतनी मोहलत तो दे
क्यों गम पे गम दिए जाते हैं
कुछ तो ठहरो ज़रा शक्ति दे दो,
कि खुशी से इनको सह पाऊं
तुझसे जुल्मों का तेरे
शिकवा न करूं।
खुद को अफसाना
बनाकर पीती रहूं
अरमानों के घरौंदे तो
बहुत कुचले है
पर कुचलने का दर्द तो
कुछ कम होने दो।
