STORYMIRROR

Rochana Singh

Abstract

3  

Rochana Singh

Abstract

समय कभी एक सा नहीं रहता

समय कभी एक सा नहीं रहता

1 min
63

जो ना देते थे कभी जवाब,

उनके सलाम आने लगे हैं।


कांच के टुकड़े-टुकड़े कर,

उसे जोड़ने के कुछ लोग


क्या खूब वहम पालने लगे हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract