STORYMIRROR

Shant Gautam

Tragedy Fantasy

3  

Shant Gautam

Tragedy Fantasy

इंतजार

इंतजार

1 min
211

अच्छे वक़त में कलम नहीँ चलती

ये मेरे बुरे वक़्त का इन्तजार करती है, 


अब इस कलम को में

माशूक का नाम दूँ तो गलत नहीं, 


ये मेरे प्यार से ज्यदा मेरे

बुरे वक़्त का इंतजार करती है। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy