Shant Gautam
Tragedy Fantasy
रुखसत होते हुए एक वादा किया था,
चेहरा ना कभी देख पाओगे ये दावा किया था,
मौसमों ने तो कभी कहा नहीं,
पर पेड़ों ने खड़े होने का इशारा किया था,
है इक हिज़्र में ज़ेहन मेरा,
तुझे देखे बिना ही मर जाते ना कभी ये
सवाल किया था।
आज़ादी
मंज़िल
तेरा शहर
लफ़्ज़ों का ख...
एक शख्स से मु...
सफ़र सुहाना
हार नहीं मानू...
मेरे यार ने अ...
अंज़ाम
हिज़्र
सच्चाई जिन्दगी की यही है कि तूफनों मे घर टूट जाया करते हैं। रिश्तों के इम्तिहानों में अक्सर लोग... सच्चाई जिन्दगी की यही है कि तूफनों मे घर टूट जाया करते हैं। रिश्तों के इम्तिह...
इसलिए जब थक जाती हूँ बहुत तो खुद को समेटकर फिर से चल देती हूँ...। इसलिए जब थक जाती हूँ बहुत तो खुद को समेटकर फिर से चल देती हूँ...।
मौका था पर ख़ुश होने की फुर्सत नहीं थी ख़ुशी तो अब अगली मंज़िल में थी। मौका था पर ख़ुश होने की फुर्सत नहीं थी ख़ुशी तो अब अगली मंज़िल में थी।
जिन के वजूद से अपना वजूद ख़ुशगवार है। जिन के वजूद से अपना वजूद ख़ुशगवार है।
पापा, दे दो न आजादी ,मेरे सपनो को, मैं भी इतिहास गड़ना चाहता हूँ। पापा, दे दो न आजादी ,मेरे सपनो को, मैं भी इतिहास गड़ना चाहता हूँ।
दर्द-ए-दिल का इलाज ढूँढ़ते, मौत की शै में मिला इलाज... दर्द-ए-दिल का इलाज ढूँढ़ते, मौत की शै में मिला इलाज...
माना आसान नहीं होगा कौन उसका बोझ झेलेगा पर खुशी बहुत होगी जब वो तेरी बाँहों में खेलेगा। माना आसान नहीं होगा कौन उसका बोझ झेलेगा पर खुशी बहुत होगी जब वो तेरी बाँहों में...
वह चाहे अनगिनत कर ले जतन न हारा था ना हारेगा कभी अपना वतन। वह चाहे अनगिनत कर ले जतन न हारा था ना हारेगा कभी अपना वतन।
एक नया रिश्ता हो , फिर नई शुरुआत हो बड़ी हिम्मत से मैंने उस पोटली की गिरहें खोली कुछ भी तो ऐसा नह... एक नया रिश्ता हो , फिर नई शुरुआत हो बड़ी हिम्मत से मैंने उस पोटली की गिरहें खो...
म सब पंचतत्व से निर्मित , हमें इस मिट्टी में ही मिल जाना है , बस जाते - जाते इस मिट्टी में , पलाश... म सब पंचतत्व से निर्मित , हमें इस मिट्टी में ही मिल जाना है , बस जाते - जाते इ...
दिल के उसी कोने को जरा छू के देखना, धड़कन वहाँ मेरी मचल रही है मेरे दोस्त ! दिल के उसी कोने को जरा छू के देखना, धड़कन वहाँ मेरी मचल रही है मेरे दोस्त !
वो अब भी एक मज़दूर है। वो अब भी एक मज़दूर है।
मोबाइलों से चिपटी लाशें ही बस घूम रहीं ऐसे दौर में अगली पीढ़ी का बोझ कौन उठाएगा। मोबाइलों से चिपटी लाशें ही बस घूम रहीं ऐसे दौर में अगली पीढ़ी का बोझ कौन उठाएगा।
काश...इस कालिख से बच पाते देश के ये भविष्य, ये नन्हे नौनिहाल..... काश...इस कालिख से बच पाते देश के ये भविष्य, ये नन्हे नौनिहाल.....
हां रोका था तुमने अपना स्कूटर और करने वाले थे डायल 100 फिर अचानक अंगुलियाँ ठिठक गई उनके घर का माम... हां रोका था तुमने अपना स्कूटर और करने वाले थे डायल 100 फिर अचानक अंगुलियाँ ठिठ...
sdajsdjasidashdbd sdajsdjasidashdbd
मन में दहकती दाह थी पर कहीं नहीं सिक रही थी रोटियाँ ? मन में दहकती दाह थी पर कहीं नहीं सिक रही थी रोटियाँ ?
पाषाणों में रहते-रहते, प्रभु ! क्या तुम भी पाषाण हो गए ? पाषाणों में रहते-रहते, प्रभु ! क्या तुम भी पाषाण हो गए ?
वो तब भी एक मज़दूर था वो अब भी एक मज़दूर है। वो तब भी एक मज़दूर था वो अब भी एक मज़दूर है।
ना पेड़ और ना ही रुह ने ये कहर ढाहा, मुझे तो मेरे अंदर के डर ने मार डाला। ना पेड़ और ना ही रुह ने ये कहर ढाहा, मुझे तो मेरे अंदर के डर ने मार डाला।