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Shant Gautam

Abstract Tragedy

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Shant Gautam

Abstract Tragedy

मंज़िल

मंज़िल

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एक रास्ते में मिले थे हम दोनों, 

एक मंज़िल तक का वास्ता था, 

जहाँ जाते थे कदम तेरे, 

मेरा उसी जगह से राबता था। 


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