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Shant Gautam

Abstract

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Shant Gautam

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कितना चलुं तेरी राह पर मै, ख़ुद के निशान भूल जाऊँगा

है फ़िक्र तुझे मेरी तो जता तो सही, यूँ ख़ुद से दूर मैं हो जाऊँगा

रहा भटकता दर -बदर तेरे साये के पीछे, अंजाम दिखा कभी तो बदनाम हो जाऊंगा। 


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