STORYMIRROR

Ajay Singla

Drama

3  

Ajay Singla

Drama

ईश्वर से मुलाकात

ईश्वर से मुलाकात

1 min
372

एक्सीडेंट हुआ था मेरा

सर पर चोट बड़ी गहरी थी

वेंटीलेटर लगा हुआ था

सांस शायद कुछ पल ठहरी थी।


कोमा में मैं चला गया था

न कुछ बोलूं, न सुन पाता

दिखी एक प्रचंड रौशनी

देखा मैंने था विधाता।


तेज रौशनी के बीच में

आकाशवाणी हुई एक तभी

तू यहाँ कैसे आ गया

वक़्त नहीं आया तेरा अभी।


इतने में क्या हुआ पता नहीं

एक नर्स की आवाज आई

मरीज को है होश आ गया

माँ को दे रही बधाई।


जब मैं थोड़ा ठीक हुआ तो

सबको मैंने किस्सा सुनाया

मौत से जब मैं जूझ रहा था

भगवन से मैं तब मिलकर आया।


कोई मेरा विश्वास करे न

कहें वो मन का वहम है ये सब

शुक्र करो तुम ठीक हो गए

कुछ दिन आराम करो अब।


सच था ये सपना नहीं था

समझाओगे किसको किसको

भाई ने भी ऐसा कहा तो

ये था कहना पड़ा मुझे उसको।


मेरे लिए ये बात अटल है

तुम्हारी तो तुम ही जानो

मैंने तो सच इसे मान लिया है

तुम इसे मानो या न मानो। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama