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Ajay Singla

Inspirational

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Ajay Singla

Inspirational

गुरू वाणी

गुरू वाणी

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गुरु वाणी 


पृथ्वी पर जितने जीव समावेश 

जन्म देते ब्रह्मा लोकेश

करें पालन विष्णु निलेश 

संहार का काम करें महेश ।


समय कोई या कोई भी देश 

गृहस्थ, सन्यासी या कोई हो वेश 

साधारण जन या कोई विशेष 

होना चाहिए बस एक उद्देश्य ।


मन में चिंतन बस सर्वेश 

अहंकार का ना हो लेश 

ना रहे फिर चिंता, कलेश 

प्रभु की रहे तुम पर अशेष ।


भजन में तुम करो समय निवेश 

क्षण, पहर या कुछ निमेष 

जितनी भी घड़ियाँ हैं शेष 

हृदय में रखो तुम दरवेश ।


मनुष्य हो या इंद्र सुरेश 

जिसमें धर्म का ना हो लवलेश 

रौंदे गए ऐसे कई नरेश 

पतन होगा जैसे लंकेश ।


काल ना जाने निर्धन, नरेश 

रह जाते हैं बस अवशेष 

यमपुरी में जब हों पेश 

प्रभु के धाम में हो प्रवेश ।


गुरुजनों का यही संदेश 

चाहे समझो इसे आदेश 

ना रखो किसी से तुम द्वेष 

ईश्वर तब होंगे हितेश ।


अजय सिंगला


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