गुरू वाणी
गुरू वाणी
गुरु वाणी
पृथ्वी पर जितने जीव समावेश
जन्म देते ब्रह्मा लोकेश
करें पालन विष्णु निलेश
संहार का काम करें महेश ।
समय कोई या कोई भी देश
गृहस्थ, सन्यासी या कोई हो वेश
साधारण जन या कोई विशेष
होना चाहिए बस एक उद्देश्य ।
मन में चिंतन बस सर्वेश
अहंकार का ना हो लेश
ना रहे फिर चिंता, कलेश
प्रभु की रहे तुम पर अशेष ।
भजन में तुम करो समय निवेश
क्षण, पहर या कुछ निमेष
जितनी भी घड़ियाँ हैं शेष
हृदय में रखो तुम दरवेश ।
मनुष्य हो या इंद्र सुरेश
जिसमें धर्म का ना हो लवलेश
रौंदे गए ऐसे कई नरेश
पतन होगा जैसे लंकेश ।
काल ना जाने निर्धन, नरेश
रह जाते हैं बस अवशेष
यमपुरी में जब हों पेश
प्रभु के धाम में हो प्रवेश ।
गुरुजनों का यही संदेश
चाहे समझो इसे आदेश
ना रखो किसी से तुम द्वेष
ईश्वर तब होंगे हितेश ।
अजय सिंगला
