मैं कौन हूँ
मैं कौन हूँ
मैं कौन हूँ
क्या मैं एक नन्हा सा बालक
खेलता भाई बहनों के संग
या पुत्र ममतामयी माँ का
प्रेम लुटाता जिसका अंग अंग ।
सुंदर युवा हूँ मैं क्या ऐसा
मित्रों संग जो करे हँसी ठिठोली
प्रेम के रंग में रंगना चाहे सदा
मीठी लगे जिसे प्यार की बोली ।
या मैं वो पति हूँ जिसकी
पत्नी प्रेम से उसे खिलाए
या वो पिता, अपने पुत्रों का
पोषण जो करे, सही राह दिखाए ।
काल से वृद्ध हुआ क्या मैं हूँ
सोच में पड़ा भूत, भविष्य की
मृत्यु के भय से प्रभु को भजूँ, ताकि
भावी जन्म में पाऊँ उत्तम गति ।
क्या बस यही सब कुछ ही हूँ मैं
या एक परब्रह्म अविनाशी
अंश सर्वव्यापी ईश्वर का या
माया का जो प्रभु चरणों की दासी ।
स्वयं को अब तक ना समझ सका
मुक्ति हो कैसे माया से जगत की
पाना चाहता तुम परमपिता को पर
ना जानूँ सही डगर भक्त की ।
कृपा आपकी सर्वसमर्थ है
शरण आपकी दृढ़ लक्ष्य मेरा
मोह माया, आसक्तियों ने पर है
मेरे हृदय में डाला डेरा ।
प्रभो? मैं शरणागत तुम्हारी
संसार भँवर से पार लगा दो
संताप, भय सभी हर लो मेरे
कृपानिधान, उनको भगा दो ।
