Amit Bhatore
Drama
सिर्फ मानव के नहीं होते
प्रकृति के भी होते हैं,
जो छीन लेते हैं सब कुछ
बिना किसी हथियार के,
पेड़ों को काटकर बिगाड़ते हैं
प्राकृतिक संतुलन,
जलाकर अवशेष
धुएं से कर रहे सांसों को बोझिल,
ऐसे हत्यारों को प्रकृति देगी सजा।
फ़िल्म
किताब
वक्त
मजदूर ही तो ह...
साथ में मिलकर...
सुंदरता को दे...
तुम नारी ही ह...
ग्रीष्मावकाश
नेह ह्रदय का ...
सच की राह पे ...
जैसा बोते वैसा काटते, कई ख्वाब बिलौते।। जैसा बोते वैसा काटते, कई ख्वाब बिलौते।।
नाचो, गाओ सब हिंद सैनिकों को दुआएं दो, जीभर। नाचो, गाओ सब हिंद सैनिकों को दुआएं दो, जीभर।
किस किस ने उस बिटिया की विदाई पर नम आंखो से उसे विदा किया होगा।। किस किस ने उस बिटिया की विदाई पर नम आंखो से उसे विदा किया होगा।।
जिस वक़्त के पीछे पड़ा था मैं पहले, अब ये उस वक़्त को मेरे पीछे लगा के चली गयी है। जिस वक़्त के पीछे पड़ा था मैं पहले, अब ये उस वक़्त को मेरे पीछे लगा के चली गयी ...
मेरा हर कहना सुनना होगा, मेरा हर सवाल का जवाब देना होगा। मेरा हर कहना सुनना होगा, मेरा हर सवाल का जवाब देना होगा।
चाहें कैसी भी हों, एक बहन तो होनी ही चाहिए। चाहें कैसी भी हों, एक बहन तो होनी ही चाहिए।
जीने की वजह छूट गई, बस बची थी यादें बाकी रह गई। जीने की वजह छूट गई, बस बची थी यादें बाकी रह गई।
सुनो तो ना किसी को पाएंगे लेकिन, अब तुझको ना भूल पाएंगे, सुनो तो ना किसी को पाएंगे लेकिन, अब तुझको ना भूल पाएंगे,
जिसने सुना और सुनाया उसकी कटी भवबाधा सारी।। जिसने सुना और सुनाया उसकी कटी भवबाधा सारी।।
सुन लो तुम अरज हमारी आयी मैं द्वार तिहारी। सुन लो तुम अरज हमारी आयी मैं द्वार तिहारी।
कोशिश करो, संघर्ष से कतई भी न डरो, प्यारे आज न कल होंगे, कोशिश से जमीं पे सितारे। कोशिश करो, संघर्ष से कतई भी न डरो, प्यारे आज न कल होंगे, कोशिश से जमीं पे सित...
तुम्हारी याद, तुम्हारा एहसास, तुम्हारी अनुभूति, तुम्हारा स्नेह, तुम्हारी बोतल में बंद तुम्हारी याद, तुम्हारा एहसास, तुम्हारी अनुभूति, तुम्हारा स्नेह, तुम्हारी बोत...
किसी अपने का असामयिक निधन विचलित कर देता है, हमारा यह मन। किसी अपने का असामयिक निधन विचलित कर देता है, हमारा यह मन।
लगातार रहेगी, मेरी तो कदमताल इस बार छूना है,मुझको हिम भाल। लगातार रहेगी, मेरी तो कदमताल इस बार छूना है,मुझको हिम भाल।
जुगनू बनकर वही चमकता है,रे इस संसार जिसके खुद के भीतर ही हो रोशनी पारावार। जुगनू बनकर वही चमकता है,रे इस संसार जिसके खुद के भीतर ही हो रोशनी पारावार।
ऐसे युद्ध से हमारे परिवार का बस अंत ही होना है। ऐसे युद्ध से हमारे परिवार का बस अंत ही होना है।
बहुत पीछे छूट गए, कैसे बयां करूँ लफ़्ज़ों में कि क्या कुछ नहीं पीछे छूट गया। बहुत पीछे छूट गए, कैसे बयां करूँ लफ़्ज़ों में कि क्या कुछ नहीं पीछे छूट गया।
लेकिन सवाल यही है क्या वो वापस आएगा कया वो वापस आएगा। लेकिन सवाल यही है क्या वो वापस आएगा कया वो वापस आएगा।
हमारे आदरणीय प्रधान मंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएँ। हमारे आदरणीय प्रधान मंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएँ।