ख़ाक .
Tragedy
कौन जाने क्या तूफान है मेरे अंदर,
एक अर्से से उठ रहा ये उफान है मेरे अंदर।
हंस कर मिल लेता हूं हर शख्स से मै,
पर दर्दो का एक काला अंधेरा खदान है मेरे अंदर।
अब वक्त कहा ह...
उड़ना भूल गया...
कश्ती
हंस कर मिल ले...
हालात
थका तो नहीं ह...
ऐसे जीना भी क...
हर्फ़-दर-हर्फ़
नबी बने बैठे ...
रास्ते
अंजान इक जहां में उतारा गया मुझे पहना के सुर्ख जोड़ा सँवारा गया मुझे! अंजान इक जहां में उतारा गया मुझे पहना के सुर्ख जोड़ा सँवारा गया मुझे!
अन्नाजी में आ गई, फिर थोड़ी-सी जान, क्या अनशन को भी भला, सुन लेगा सुल्तान ?१ अन्नाजी में आ गई, फिर थोड़ी-सी जान, क्या अनशन को भी भला, सुन लेगा सुल्तान ?१
चंद महीने ही गुज़रे हैं हो गए सब बेहाल जाने कैसा गुजरेगा अब ये पूरा साल! चंद महीने ही गुज़रे हैं हो गए सब बेहाल जाने कैसा गुजरेगा अब ये पूरा साल!
अपने ही अपनों के हृदय पर ,ऐसी कर रहे चोट , लकड़ी ही जंगल को काटे, बन कुल्हाड़ी की मोंठ । अपने ही अपनों के हृदय पर ,ऐसी कर रहे चोट , लकड़ी ही जंगल को काटे, बन कुल्हाड़ी की...
इंसानों के दुःख दर्द में हम बन न पाये सहभागी क्यों। इंसानों के दुःख दर्द में हम बन न पाये सहभागी क्यों।
वो मांगती कुछ तुमसे नहीं है जीना मगर क्या उसका हक नहीं है ? वो मांगती कुछ तुमसे नहीं है जीना मगर क्या उसका हक नहीं है ?
ऐसे तो क्षण कभी न बीते साजन बिन हम रहे रीते अब के सावन में......! ऐसे तो क्षण कभी न बीते साजन बिन हम रहे रीते अब के सावन में......!
एक मोमबत्ती से करने देश की बेटी को याद। एक मोमबत्ती से करने देश की बेटी को याद।
मगर वह हार गया जब प्रेम मेरे साथ और नफरत उसके साथ थी खड़ी। मगर वह हार गया जब प्रेम मेरे साथ और नफरत उसके साथ थी खड़ी।
आज जब लिखना जानता हूँ तो कलम छीन लेते हैं लोग ! आज जब लिखना जानता हूँ तो कलम छीन लेते हैं लोग !
जिन्दा न आ सका तो कफ़न मे लिपटकर आना है। जिन्दा न आ सका तो कफ़न मे लिपटकर आना है।
किसने सोचा था आएगा, एक साल ऐसा भी । जब घर जाकर अपनो से मिलना, लगने लगेगा सपना ही । किसने सोचा था आएगा, एक साल ऐसा भी । जब घर जाकर अपनो से मिलना, लगने लगेग...
कहते हैं तल्ख अनुभव से लफ्जों को भी निचोड़ लें रहे हो। कहते हैं तल्ख अनुभव से लफ्जों को भी निचोड़ लें रहे हो।
अन्धविश्वास एक धीमा ज़हर है जो संहार करता है सबका ! अन्धविश्वास एक धीमा ज़हर है जो संहार करता है सबका !
अहा! बिल्कुल जैसे सपनों में सजाया था स्वर्ण की चमक जिसपर सौंदर्य आभा था अहा! बिल्कुल जैसे सपनों में सजाया था स्वर्ण की चमक जिसपर सौंदर्य आभा था
मक़सद ख़ुदा का है ऐ बंदे प्यार मोहब्बत आदत पाल ये खेल बुराई के हैं गंदे! मक़सद ख़ुदा का है ऐ बंदे प्यार मोहब्बत आदत पाल ये खेल बुराई के हैं गंदे!
आज की लड़कियां, प्रेम करती हैं पैसा,पावर देखकर! आज की लड़कियां, प्रेम करती हैं पैसा,पावर देखकर!
फिर भी वो.. शीतलहर की चिर निद्रा में सो गया। फिर भी वो.. शीतलहर की चिर निद्रा में सो गया।
खामोश मन की तलाश है, ना जाने क्यूँ आज ये दिल उदास है। खामोश मन की तलाश है, ना जाने क्यूँ आज ये दिल उदास है।
देते हैं फरमान यही सब राजा हो या रानी । तज खेती कर ले मजदूरी, छोड़ अरे नादानी ! देते हैं फरमान यही सब राजा हो या रानी । तज खेती कर ले मजदूरी, छोड़ अरे नाद...