ख़ाक .
Tragedy
कौन जाने क्या तूफान है मेरे अंदर,
एक अर्से से उठ रहा ये उफान है मेरे अंदर।
हंस कर मिल लेता हूं हर शख्स से मै,
पर दर्दो का एक काला अंधेरा खदान है मेरे अंदर।
अब वक्त कहा ह...
उड़ना भूल गया...
कश्ती
हंस कर मिल ले...
हालात
थका तो नहीं ह...
ऐसे जीना भी क...
हर्फ़-दर-हर्फ़
नबी बने बैठे ...
रास्ते
बैठे महफिल में, जैसे गुम हो गया है कोई लाखों की भीड़ में। बैठे महफिल में, जैसे गुम हो गया है कोई लाखों की भीड़ में।
आईना दिखा देता है आपकी , असली सूरत। आईना दिखा देता है आपकी , असली सूरत।
लडकों की एक बात मुझे बड़ा भाती है। लडकों की एक बात मुझे बड़ा भाती है।
और पाने की चाहत में वहां करार कहां आया, और पाने की चाहत में वहां करार कहां आया,
निंद में से मुझे जगाकर, तेरे पीछे दौड़ाती है, निंद में से मुझे जगाकर, तेरे पीछे दौड़ाती है,
आज हर शख्श दुनिया का नक़ाब में नज़र आता है। आज हर शख्श दुनिया का नक़ाब में नज़र आता है।
अरमान और सतरंगी सपने। भूली रह गया याद सलीका। अरमान और सतरंगी सपने। भूली रह गया याद सलीका।
तुम्हारा हाथों में कठपुतली बनकर खेलते खेलते थक गई हूं । तुम्हारा हाथों में कठपुतली बनकर खेलते खेलते थक गई हूं ।
कामयाब होने का हुनर सिखाने चले हैं दुनियां की परेशानियों से जो कभी घिरे नहीं। कामयाब होने का हुनर सिखाने चले हैं दुनियां की परेशानियों से जो कभी घिरे नहीं।
मै रहूं ना रहूं दुनिया में कोई मेरा वो इतिहास लिख दे। मै रहूं ना रहूं दुनिया में कोई मेरा वो इतिहास लिख दे।
री गज़ल लिखता था मै "मुरली", मेरी गज़ल अधूरी रहे गई। री गज़ल लिखता था मै "मुरली", मेरी गज़ल अधूरी रहे गई।
अब फसल तो ठीक हो गई पर किसान की सेहत खराब रहने लगी। अब फसल तो ठीक हो गई पर किसान की सेहत खराब रहने लगी।
दिल में बसी ख्वाहिशों का, अब तकिया है खाली, बिखरी चाँदनी रातों में, आँसुओं की कहानी। दिल में बसी ख्वाहिशों का, अब तकिया है खाली, बिखरी चाँदनी रातों में, आँसुओं की...
तेरे मेरे दरमियाँ, अचानक कहाँ से आ गई ये गलतफहमियां। तेरे मेरे दरमियाँ, अचानक कहाँ से आ गई ये गलतफहमियां।
तेरी यादों में डूब गया हूं यार मैं इस कदर तेरे जाने से तेरी यादों में डूब गया हूं यार मैं इस कदर तेरे जाने से
खुश होगा अंधकार भी एक दिन, होगा एक शाम रौशन भी एक दिन। खुश होगा अंधकार भी एक दिन, होगा एक शाम रौशन भी एक दिन।
देखो इसने अपनों से ही विषपान किया, कैसे हुये नादान हम फिर भी होंठ सिया। देखो इसने अपनों से ही विषपान किया, कैसे हुये नादान हम फिर भी होंठ सिया।
दर्द जब इतना मिला कि दर्द ही दर्द को थाम ले। दर्द जब इतना मिला कि दर्द ही दर्द को थाम ले।
इस नाक के लिए हमने न जाने क्या-क्या जतन किए। इस नाक के लिए हमने न जाने क्या-क्या जतन किए।