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ख़ाक .

Tragedy

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ख़ाक .

Tragedy

हंस कर मिल लेता हूं

हंस कर मिल लेता हूं

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कौन जाने क्या तूफान है मेरे अंदर,

एक अर्से से उठ रहा ये उफान है मेरे अंदर।

हंस कर मिल लेता हूं हर शख्स से मै,

पर दर्दो का एक काला अंधेरा खदान है मेरे अंदर।


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