STORYMIRROR

ख़ाक .

Tragedy

2  

ख़ाक .

Tragedy

हालात

हालात

1 min
394

कुछ कह सकूँ ऐसे मेरे हालात कहाँ है,

लफ़्ज़ों में बयान हो जाए ऐसे जज़्बात कहाँ है।


जो समझते तो समझ लेते मेरी ख़ामोशी,

पर तुम कुछ समझ सको ऐसी तुम में बात कहाँ है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy