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ख़ाक .

Tragedy

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ख़ाक .

Tragedy

हालात

हालात

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कुछ कह सकूँ ऐसे मेरे हालात कहाँ है,

लफ़्ज़ों में बयान हो जाए ऐसे जज़्बात कहाँ है।


जो समझते तो समझ लेते मेरी ख़ामोशी,

पर तुम कुछ समझ सको ऐसी तुम में बात कहाँ है।


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