STORYMIRROR

ख़ाक .

Tragedy

2  

ख़ाक .

Tragedy

हालात

हालात

1 min
392

कुछ कह सकूँ ऐसे मेरे हालात कहाँ है,

लफ़्ज़ों में बयान हो जाए ऐसे जज़्बात कहाँ है।


जो समझते तो समझ लेते मेरी ख़ामोशी,

पर तुम कुछ समझ सको ऐसी तुम में बात कहाँ है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy