STORYMIRROR

Amit Kumar

Abstract Tragedy Inspirational

4  

Amit Kumar

Abstract Tragedy Inspirational

क़यामत

क़यामत

1 min
368

यूँ भी गिर जाऊंगा

नज़रों से मैं तो

एक बार ज़रा मुझसे

नज़रें तो मिला ले


क़यामत से क्यों 

क़यामत है आई

इस बात पर तु भी 

ज़रा मुस्कुरा ले


जो आंखों के रास्तें

बदहवास कर रहा है 

मेरे होशोहवास को

उस शख़्स से तू भी

ज़रा नज़र तो मिला ले


आज नहीं तो कल

तू भी मतलबपरस्त होगा

तू चाहे तो ज़िंदगी की

मुझसे हर शर्त लगा ले।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Amit Kumar

Similar hindi poem from Abstract