शिकवा
शिकवा
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कैसे कहे हम किससे कहे हम
सब अपने हुए जब पराये
जिनको अपना हमने माना वो
कहते है हम थे साये दर्द
यह अपना दिया है उनका
जिनको कोई दर्द नहीं है
प्यार का कैसा रोग है यारों
इसका कोई जोग नहीं है
जो हँसते थे कभी किसी पर
आज यह दुनिया उनपर हँसे है
कैसी उलझन पड़ी है हाय!
उनकी आँखें जबसे देखी
सब कुछ हम तो भूल गए है
बस उनकी ही याद है आये
वो समझे या जाने न हमको
हमको इससे क्या है हाय!
उनका कोई दोष नहीं है
मुहब्बत में हम पड़े क्यों हाय!
मेरे मालिक खुश रहे वो भी
जिनके हमने दिल है दुखाये
दर्द का मतलब क्या होता है
आज यह हमको समझ है आये ...
