STORYMIRROR

ख़ाक .

Romance

2  

ख़ाक .

Romance

रास्ते

रास्ते

1 min
351

जिन रास्तों पर साथ चलने की

कसमें खाई थी हमने 

आज उन रास्तों पर मैं

अकेला ही खड़ा हूँ 


तू साथ थी जब तक,

उड़ता था मैं परिंदों की तरह 

आज देख मैं सर से पाँव तक

ज़मीन में गड़ा हूँ


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance