STORYMIRROR

Ajay Gupta

Romance Tragedy

4  

Ajay Gupta

Romance Tragedy

चाँद

चाँद

1 min
422

 चाँद कितना बेईमान तू निकला 

मैंने क्या कह दिया कि तुम मेरे चांद सा नहीं 

बादलों के ओट में तू जा बैठा 

जलता है तू भी मेरे चांद से 


इसीलिए कभी आधा कभी पूरा बन बैठा 

आ जाते हैं चांद जब कभी मेरे घर के दरवाजे पर 

अमावस की रात बन तू फ़रार निकला 


आ चांद तू भी बैठ कभी हम से बात कर लो... 

मेरे चांद से मिलों चांद आँखें चार कर लो 

चाँदनी को भी साथ लाना इधर 

हो जाने दो फैसला अभी कि आखिर 

किसका चांद ज्यादा बेवफ़ा निकला।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance