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निखिल कुमार अंजान

Classics

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निखिल कुमार अंजान

Classics

हे शंकर आओ धरा पे.....

हे शंकर आओ धरा पे.....

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हे शंकर आओ धरा पे

मानवता जल रही है

बचाओ धरा पे


हे शंकर आओ धरा पे

मजहबी खाचों मे 

बंट रहा है हिंदुस्तान 

बचाओ धरा पे


हे शंकर आओ धरा पे

प्रेम मिट रहा है

बचाओ धरा पे


हे शंकर आओ धरा पे

बढ़ रहा है पाप 

सत्य को बचाओ धरा पे


हे शंकर अब 

आ भी जाओ धरा पे

जड़ हो चुके इंसान को

चेतन का मार्ग दिखाओ

धरा पे...... 



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