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Deepti Tiwari

Tragedy

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Deepti Tiwari

Tragedy

हौसला

हौसला

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न जाने कितनी बार ये दिल टूटा,

कभी अपनो ने तो कभी गैरो ने तोड़ा,

हर बार ये सूखी आँखे आँसुओ के समन्दर मे डूब जाता है,

हर बार यही होता है,

मै खुश होती हूँ,

और कोई वजह छीन जाता है,

हर वक़्त ये नजारा साफ देखा,

अपनो मे डुबाने का हौसला साफ नजर आया,

मैं जब भी गिरी सम्हलने को हाथ फैलाया,

खींच कर गिराने मे,

अपनो का ही हाथ आया।


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