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Habib Manzer

Drama Fantasy

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Habib Manzer

Drama Fantasy

हौसला से

हौसला से

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हौसला से उड़ा आसमान में,

डोर उम्मीद से था जुड़ा मैं ।


जब पतंगो ने कर ली लड़ाई,

लुटकर फिर पतंगे चला मैं ।।


कैसा रिश्ता सितारों से मेरा,

रात भर चाँद तकता रहा मैं ।


प्यास धरती की बारिश बुझाये,

रूह से कितना प्यासा रहा मैं ।।


दिन की गिनती में लम्हे गुज़ारा,

रात भर ख्वाब मे फिर रहा मैं ।


कितनी उलझन थी दिल में हमारे,

कैसे चाहत में हर पल खड़ा मैं ।।


रौशनी चाँद सूरज में देखा,

घर को रौशन भी ऐसे किया मैं ।


हर परिंदे की चाहत में देखा,

रात जुगनू के पीछे पड़ा मैं ।।


खेल जीवन का जब मैंने समझा,

हर खुशी से किनारा किया मैं ।


छोड़कर दिल को घर से मैं निकला,

फिर नज़र दिल इशारा किया मैं ।।


ख्वाब महंगे सफर दिल है मुश्किल,

बेमरौउत सनम दिल किया मैं ।।


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