STORYMIRROR

Habib Manzer

Romance Tragedy Fantasy

4  

Habib Manzer

Romance Tragedy Fantasy

जिंदगी तुम मेरी थी

जिंदगी तुम मेरी थी

1 min
257

कभी साथ मेे ज़िंदगी तुम मेरे थी

कभी सोंच मे तुम्ही शामिल मेरे थी


कभी ज़िंदगी की तमन्ना सनम तुम

कभी आशिकी दिल्लगी तुम मेरी थी


कभी ख्वाब चाहत की तस्वीर मेरी

कभी राज़ खूशियों की तुम्ही मेरी थी


कभी आसना दिल भी मेरा था तुमसे

कभी तिश्नगी रूह की तुम मेरी थी


कभी दर पे दिल के था दस्तक तुम्हारा

कभी लफ्ज़ चाहत सनम तुम मेरी थी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance