STORYMIRROR

Saroj Garg

Romance

3  

Saroj Garg

Romance

हाइकु

हाइकु

1 min
268

प्रभात बेला में हाइकु

मन अंगड़ाई ले

प्रसन्न तन


रात की चादर  

तारे ओढ़कर 

मुस्कुराते 


मधुर रागिनी 

हवाओं ने गाई

फिज़ाये मुस्कुराई।


मयूरा मन 

नाच उठा तन

प्रसन्न हो कर।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance