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Saroj Garg

Romance

3  

Saroj Garg

Romance

हाइकु

हाइकु

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प्रभात बेला में हाइकु

मन अंगड़ाई ले

प्रसन्न तन


रात की चादर  

तारे ओढ़कर 

मुस्कुराते 


मधुर रागिनी 

हवाओं ने गाई

फिज़ाये मुस्कुराई।


मयूरा मन 

नाच उठा तन

प्रसन्न हो कर।



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