STORYMIRROR

Savita Verma Gazal

Romance

4  

Savita Verma Gazal

Romance

गुनगुनी सी धूप

गुनगुनी सी धूप

1 min
329

अंजुरी में भर लेने दो

कल पता क्या धूप

 ये खिले ना खिले

बादलों और शीतल हवाओं में 

आजकल है खूब बनी

धूप से मानों दोनों की है 


ठनी

धूप गर थोड़ी मिले तो थोड़ी

तुम्हारे प्यार की,

गर्माहट बने अहसास में

वरना तो सीली पड़ी है

नगरी ये जज्ब्बात की

यूँ ही बदलते रहना फितरत है 


मौसम की सुनो

क्यों बदलते हैं इंसा 

बात ये मुश्किल समझनी

हम सहेजें ही सदा 

दौलत रिश्तों की रहे

पर फरेबी बन गये रिश्तों के 

ये ढेर भी


गुनगुनी सी धूप थोड़ी अंजुरी में 

भर लेने दो

शायद रिश्तों में गर्माहट थोड़ी बने

दूरियों की सीलन हटे और

प्रेम का संचार हो।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance