STORYMIRROR

Chandni Purohit

Abstract Inspirational

4  

Chandni Purohit

Abstract Inspirational

गुमनाम जिंदगी

गुमनाम जिंदगी

1 min
277

 मोहब्बत की तुमसे हाल मेरा बेहाल है बेरुखी 

क्यूँ हर वक़्त शिकन माथे पर है गुमनाम जिंदगी 


साँसों पर तेरा नाम धड़कन को ऐतबार रहनुमा 

तू भी तो कर मुझसे प्यार कर थोड़ी सी बंदगी 


खुले आसमाँ के तले मौन हैं लब चीत्कार गूँजती 

बेपरवाह हुई सारी हसरतें और आवारा दिल्लगी 


कोई लौट के आने का पैगाम भेजता है मानों 

कैसे बताये देरी हुई अब तो भायी गुमनाम जिंदगी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract