गुलाबी शाम ढलने को है
गुलाबी शाम ढलने को है
तेरी ज़ुल्फ़ों की घनी छाँव में,
धीरे-धीरे ये सांझ ढल जाएगी,
नीले आकाश के आँचल तले,
हमारी ख्वाहिशें पल जाएँगी।
इंतज़ार करूँगा उसी जगह,
जहाँ पंछी बन चहका करते थे,
इक दूजे की बाहों में सिमटकर,
खुशबु बनकर महका करते थे।
शाम होगी, डूबता सूरज होगा,
होंगी हमारी बेकरार तन्हाईयाँ,
रात होगी बेताब निकलने को,
शिवालय में गूंजेगी शहनाईयाँ।
कितने लालायित होंगे वह पल,
जब बिछुड़े दिल फिरसे मिलेंगे ,
यादों के गुलाबी अंकुर फूटकर,
अनुराग के धवल पुष्प खिलेंगे।
हिमालय से बहती हवाओं को,
पलकें झुकाकर सलाम करना,
मेरे प्रेम को अंगीकार कर लेना,
फिर चाहे जितना बदनाम करना। है
तेरी ज़ुल्फ़ों की घनी छाँव में,
धीरे-धीरे ये सांझ ढल जाएगी,
नीले आकाश के आँचल तले,
हमारी ख्वाहिशें पल जाएँगी।
इंतज़ार करूँगा उसी जगह,
जहाँ पंछी बन चहका करते थे,
इक दूजे की बाहों में सिमटकर,
खुशबु बनकर महका करते थे।
शाम होगी, डूबता सूरज होगा,
होंगी हमारी बेकरार तन्हाईयाँ,
रात होगी बेताब निकलने को,
शिवालय में गूंजेगी शहनाईयाँ।
कितने लालायित होंगे वह पल,
जब बिछुड़े दिल फिरसे मिलेंगे ,
यादों के गुलाबी अंकुर फूटकर,
अनुराग के धवल पुष्प खिलेंगे।
हिमालय से बहती हवाओं को,
पलकें झुकाकर सलाम करना,
मेरे प्रेम को अंगीकार कर लेना,
फिर चाहे जितना बदनाम करना।

