गुड़िया काठ की
गुड़िया काठ की
काठ की गुड़िया से खेलती,
लचीली सी गुड़िया को,
काठ की गुड़िया बनाते लोग।
लक्ष्मी, सरस्वती, अलिशा हो या परी,
विदाई के बाद मायके के लिए हो ग़ैरज़रूरी।
प्यारी सी गुड़ियों को, यही जतलाते लोग।
अर्थी ही उठेगी, उस आँगन से तेरी,
शहनाई के साथ, जिस आँगन में उतरी डोली।
यह क्या /क्या समझाते लोग ?
ज़िंदा गुड़िया को काट /छाँट,
काठ की गुड़िया बनाते लोग ।
बस हाँ / हूँ करना, बहस में न पड़ना।
सह लेना चुपके से, चुपके से रो लेना ।
वाचाल गुड़िया को, गूँगी गुड़िया बनाते लोग ।
ज़िंदा गुड़िया को मार,
काठ की गुड़िया को सजाते लोग।
संगीन जुर्म कर, कर के पाप घिनौना,
अपनी पीठ थपथपाते लोग।
प्यारी सी, जीवंत गुड़िया को,
मुर्दा बनाते लोग ।
