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Nand Kumar

Tragedy


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Nand Kumar

Tragedy


गरीबी

गरीबी

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सदा से हम ढोते आए है, गरीबी का भार।

सदा ही रहे हम बेबस गरीब और लाचार ।।


अपनी मेहनत का ही हमने है सदा खाया ।

सच कहूं किसी के आगे हाथ नही फैलाया ।।


लेकिन गरीबी भी हमारी है शायद अनन्त ।

कहीं कोई कभी भी इसका नही है अन्त ।।


पापो का फल है हमारे  या विधाता क्रूर न्याय ।

जो हमारे जीवन में जुड़ा यह काला अध्याय। ।।


जरूरते पूरी नही होती अभाव में पिसते रहते ।

 बच्चे शिक्षा स्वास्थ्य तो दूर दाने को तरसते।।


विकास हुआ योजना भी बनी पर गरीबी न मिटी।

कहां क्या किसमे है खोट जो गरीबी है डटी ।।



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