STORYMIRROR

Shivanand Chaubey

Tragedy

3  

Shivanand Chaubey

Tragedy

गाँव

गाँव

1 min
344

गाँव की मिट्टी की खुशबू अब पुरानी हो गयी

नीम के वो पेड़ पीपल पगडण्डी कहानी हो गयी।


सर्द मौसम में भुने आलू और रस गन्ने का जो था

आज बर्गर और पिज्जा की रवानी हो गयी।


खेत और खलिहान छूटे गाँव के चौपाल में

परिवार में न प्रेम अब नफरत की निशानी हो गयी।


लोरिया माँ की और दादी की कहानी अब नहीं

घर में लोगों का वो मिलना अब जुबानी हो गयी।


प्रेम व सद्भावना की बातें अब वो ना रही

आज जैसे डोर रिश्तों की अंजानी हो गयी !


ഈ കണ്ടെൻറ്റിനെ റേറ്റ് ചെയ്യുക
ലോഗിൻ

More hindi poem from Shivanand Chaubey

मां

मां

1 min വായിക്കുക

पत्नी

पत्नी

1 min വായിക്കുക

पर्यावरण

पर्यावरण

1 min വായിക്കുക

जल

जल

1 min വായിക്കുക

प्रकृति

प्रकृति

1 min വായിക്കുക

समाज माँ

समाज माँ

1 min വായിക്കുക

Similar hindi poem from Tragedy