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Shivanand Chaubey

Tragedy


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Shivanand Chaubey

Tragedy


गाँव

गाँव

1 min 298 1 min 298

गाँव की मिट्टी की खुशबू अब पुरानी हो गयी

नीम के वो पेड़ पीपल पगडण्डी कहानी हो गयी।


सर्द मौसम में भुने आलू और रस गन्ने का जो था

आज बर्गर और पिज्जा की रवानी हो गयी।


खेत और खलिहान छूटे गाँव के चौपाल में

परिवार में न प्रेम अब नफरत की निशानी हो गयी।


लोरिया माँ की और दादी की कहानी अब नहीं

घर में लोगों का वो मिलना अब जुबानी हो गयी।


प्रेम व सद्भावना की बातें अब वो ना रही

आज जैसे डोर रिश्तों की अंजानी हो गयी !


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