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सोनी गुप्ता

Tragedy

4  

सोनी गुप्ता

Tragedy

एक सफर ऐसा भी

एक सफर ऐसा भी

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आज घर लौटते वक्त 

सब सुनसान सा क्यों लग रहा है 

सड़कें खाली रास्ते सुनसान 

क्या बदल गया यहाँ अचानक ?

पहले तो कभी ना देखा ऐसा दृश्य 

क्योंकि आज सभी व्यस्त हैं मोबाइल में!! 


वो खेलते बच्चों की टोलियाँ

वो घर के बाहर की बैठक 

कहाँ गई वो चहचहाहट 

जिसका शोर चारों ओर फैला था 

पहले तो कभी ना देखा ऐसा दृश्य 

क्योंकि आज सभी व्यस्त हैं मोबाइल में !! 


घर पहुंचा तो देखा किताबें मेज पर पड़ी हैं

कुछ अलमारी में धूल से सनी हैं

बहुत उदास सी जान पड़ती हैं

आखिर ऐसा क्या बदल गया ? 

पहले तो कभी ना देखा ऐसा दृश्य 

क्योंकि आज सभी व्यस्त हैं मोबाइल में !! 


बाहर जोरों से बारिश हो रही थी 

पर बारिश में भीगने वाला कोई ना दिखा 

ना बच्चे ना ही बड़े कोई भी तो नहीं 

न वो कागज़ की नाव ही दिखती है 

जो कभी बच्चे प्यार से बनाया करते थे 

आखिर वो बरसात का मौसम फीका कैसे पड़ गया ? 

पहले तो कभी ना देखा ऐसा दृश्य 

क्योंकि आज सभी व्यस्त हैं मोबाइल में!! 


खाना परोसा गया मेज पर 

और यह क्या सभी अपने में व्यस्त हैं

 ना कोई बातें ना कोई हंसी ठिठोली 

वो बातों का संसार कहाँ खो गया? 

पहले तो कभी ना देखा ऐसा दृश्य 

क्योंकि आज सभी व्यस्त हैं मोबाइल में!! 


घर एक और छत भी एक है 

पर सब अलग अलग से क्यों दिख रहे हैं 

ना कोई किसी से बात करता ना ही पूछता

दीवारों पर घड़ियाँ तो टंगी हैं

पर लगता जैसे समय कहीं खो सा गया है

पहले तो कभी ना देखा ऐसा दृश्य 

क्योंकि आज सभी व्यस्त हैं मोबाइल में!! 



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