एक साईस दो घोड़ों को साधे हुए
एक साईस दो घोड़ों को साधे हुए
इस चित्र के चित्रकार शेख़ मुहम्मद अमीर
बंगाली पेंटर हैं कलकत्ते के बालीगंज के,
घोड़ों की पेंटिंग में विशेषता हासिल है इनको
कवितामय वास्तविक पेंटिंग होती है इनकी।
इन्होंने १८३० से १८४० तक शानदार चित्र बनाये हैं
इस चित्र में घोड़ा गाड़ी के दो श्वेत अश्व खड़े हैं,
दोनों पर सुन्दर ज़ीन कसी है गहरे कृष्ण वर्ण की
दोनों घोड़े ऊँचे क़द्दावर अरबी घोड़े लग रहे हैं।
दोनों अश्वों की एक सी ऊँचाई और ठवन है
दोनों अश्वों के मध्य में साईस निडर खड़ा है,
एक एक हाथ से उनके मुँह की वल्गा पकड़े हुए,
साईस की पोशाक पगड़ी सहित नीली शुभ्र है।
यह चित्र इतना स्वाभाविक है कि लगता है
गाड़ी में जोते जाने के लिये घोड़े एकदम तैयार हैं,
सूक्ष्मता से चित्र में सधी हुई रेखाएँ खींची गई हैं
घोड़ों व साईस की परछाहीं ज़मीन पर पड़ रही है।
दिन का उजाला फैला है , ख़ाली मैदान है
दूर पर पौधों वृक्षों की धुँधली सी आकृति है,
मैदान के पास का हल्का आसमानी रंग
वहां बहती नदी का आभास देता लग रहा है।
लगता है कि घोड़ों को थोड़ा घुमाने तरोताज़ा करने
और पानी पिलाने के लिये वहां लाया गया है,
चित्र का चित्रण इतना सजीव आकर्षक हुआ है
कि लगता है कुशल फ़ोटोग्राफ़र ने फोटो खींचा है।
