STORYMIRROR

chandraprabha kumar

Others

3  

chandraprabha kumar

Others

एकाकी प्रहर

एकाकी प्रहर

1 min
17


नींद नहीं आये

सुनसान रातों में

एकाकी प्रहर

पिछली बातें

मन में घुमड़तीं

सोने नहीं देतीं।


 यह मौसम

रात अन्धेरी  

बूँदों की टपटप 

वर्षा की आवाज़ 

बिसरी यादें

लौट के आयें।


Rate this content
Log in