chandraprabha kumar
Children
आज हम गये बाज़ार
लाने के लिये आलू,
आलू आलू छुट गया
साथ में आ गया भालू।
हाइकु- दिन नि...
एकान्त सा...
सफल जीवन
शिव सावन
एकाकी प्रहर
अमृत पु...
उसी का प्रसा...
गये जंगल
गये बाजार
कर्म करो
प्यारा भारत देश हमारा सबसे सुंदर सबसे प्यारा। प्यारा भारत देश हमारा सबसे सुंदर सबसे प्यारा।
शांति का देना ज्ञान है, यह वतन हमारी जान है.. शांति का देना ज्ञान है, यह वतन हमारी जान है..
आओ सीखें कखग, बातें करें मत व्यर्थ। प्यारी हिंदी दादी बोले, अंग्रेज़ी सा हो ना अनर्थ। आओ सीखें कखग, बातें करें मत व्यर्थ। प्यारी हिंदी दादी बोले, अंग्रेज़ी स...
यूं तो तुम पास न रहकर भी पास हो। मेरी जिंदगी की एक छोटी सी आस हो। यूं तो तुम पास न रहकर भी पास हो। मेरी जिंदगी की एक छोटी सी आस हो।
लफ़्ज़ छोटा तो नहीं होता, लफ़्ज़ से जिंदगी ही तो है। लफ़्ज़ छोटा तो नहीं होता, लफ़्ज़ से जिंदगी ही तो है।
सृजन सब लोग करते हैं, धरा पर जो भी आया है। सृजन सब लोग करते हैं, धरा पर जो भी आया है।
छोटी हो या बड़ी बहन पर वो एक मां का फर्ज निभाती है छोटी हो या बड़ी बहन पर वो एक मां का फर्ज निभाती है
पैरों को जमाकर में आगे बढुंगा। पर मैं हार नहीं मानूंगा। पैरों को जमाकर में आगे बढुंगा। पर मैं हार नहीं मानूंगा।
वो बहन है जो परछाई बनकर हर कदम भाई के संग चलती है वो बहन है जो परछाई बनकर हर कदम भाई के संग चलती है
वो आंसू मा की आँखों मे यह सब सिर्फ एक काग़ज़ में वो आंसू मा की आँखों मे यह सब सिर्फ एक काग़ज़ में
दही जलेबी और प्रसाद खुश हो कर भोग लगाईं थीं दही जलेबी और प्रसाद खुश हो कर भोग लगाईं थीं
बापू जिस पथ पग रखते थे कोटि जन उस ओर चल पड़ते थे। बापू जिस पथ पग रखते थे कोटि जन उस ओर चल पड़ते थे।
पहली बार वो मुझे, इतना रुला रहा था। पहली बार वो मुझे, इतना रुला रहा था।
मेरी हर तन्हाई में तेरी आवाज की गैरहाजिरी सी लगती है मेरी हर तन्हाई में तेरी आवाज की गैरहाजिरी सी लगती है
देश के लिए होकर बलिदान भारत को हम बनाएँ महान। देश के लिए होकर बलिदान भारत को हम बनाएँ महान।
भाई बहन के प्रेम,विश्वास को दर्शाता है रक्षाबंधन का त्योहार। भाई बहन के प्रेम,विश्वास को दर्शाता है रक्षाबंधन का त्योहार।
रघुपति राघव राजा राम का गीत सुनाया।। रघुपति राघव राजा राम का गीत सुनाया।।
इतिहासों का किस्सा भी हूँ। जी हाँ में राजस्थान हूँ। इतिहासों का किस्सा भी हूँ। जी हाँ में राजस्थान हूँ।
जीना चाहता हूं वो बचपन की जिंदगी फिर से जीना चाहता हूं वो बचपन की जिंदगी फिर से
स्वार्थ के बनते रिश्ते, रिश्तो में स्वार्थ कौन जानता है। स्वार्थ के बनते रिश्ते, रिश्तो में स्वार्थ कौन जानता है।