जूता मेरा
जूता मेरा
1 min
213
जब भी बढ़ जाती है ठंडी बहुत
बन जाता तभी ये जान है जूता
किसी की बन जाये ये जरूरत
तो किसी की बस शान है जूता।
किसी के तो ढेरों बिखरे रहते
तो किसी का अरमान है जूता
कोई खुश होकर छूता इसको
गुस्से में चलना आसान है जूता।
खो जाता जब कोई एक जब भी
नहीं होता कभी मेहरबान है जूता
रहता नहीं जिंदा एक दूजे के बिन
दो बदन लेकिन एक जान है जूता।
