chandraprabha kumar
Children
आज हम गए जंगल
लाने के लिए लकड़ी ,
लकड़ी लकड़ी छुट गई
साथ में आ गई लड़की।
हाइकु- दिन नि...
एकान्त सा...
सफल जीवन
शिव सावन
एकाकी प्रहर
अमृत पु...
उसी का प्रसा...
गये जंगल
गये बाजार
कर्म करो
मां का अनोखा दरबार हो, निखरे रूप अनूप।। मां का अनोखा दरबार हो, निखरे रूप अनूप।।
सारे जुल्म देखते, सहते रहते हैं जैसे बन कर कोई बंदर। सारे जुल्म देखते, सहते रहते हैं जैसे बन कर कोई बंदर।
पानी भी पीती थी पंख भीगो भिगोकर खूब नहाती थी पानी भी पीती थी पंख भीगो भिगोकर खूब नहाती थी
अपनी पीड़ा कभी ना कहती है, संतान में जिसकी जान बसती है। अपनी पीड़ा कभी ना कहती है, संतान में जिसकी जान बसती है।
क्या कोई सजा सके रंगीन तितलियों को, क्या कोई बुझा सके जलते जुगनुओं को, क्या कोई सजा सके रंगीन तितलियों को, क्या कोई बुझा सके जलते जुगनुओं को,
प्रफुल्लित , हसीं ठिठोली और गुस्सा करता हुआ प्रातः का सूर्य ।। प्रफुल्लित , हसीं ठिठोली और गुस्सा करता हुआ प्रातः का सूर्य ।।
मानवता को वनवास दिया थामकर हाथ दानवता का, मानवता को वनवास दिया थामकर हाथ दानवता का,
झुलस रहे इंसान ताप से, सूरज की मनमानी.. झुलस रहे इंसान ताप से, सूरज की मनमानी..
मां के के नौ दिन आप सभी को मुबारक हो.... मां के आगमन में पलक फावड़े बिछाकर तैयार रहिएगा मां के के नौ दिन आप सभी को मुबारक हो.... मां के आगमन में पलक फावड़े बिछाकर तै...
लड़की घर आंगन की, होती है एक शान, सोच समझकर काम ले, बनो नहीं अज्ञान। लड़की घर आंगन की, होती है एक शान, सोच समझकर काम ले, बनो नहीं अज्ञान।
खुशी न आज़म हुई मयस्सर कि दुख भरा ये बहुत जहां है। खुशी न आज़म हुई मयस्सर कि दुख भरा ये बहुत जहां है।
जन-जन की है ये अभिलाषा हिंदी बन जाए राष्ट्रभाषा। जन-जन की है ये अभिलाषा हिंदी बन जाए राष्ट्रभाषा।
गुजरना है कई अग्नि परीक्षाओं से तुम्हें..बार -बार। गुजरना है कई अग्नि परीक्षाओं से तुम्हें..बार -बार।
यह कैसा अधिकार है जहां कर्तव्य का उपहास है। यह कैसा अधिकार है जहां कर्तव्य का उपहास है।
सीता के राम शबरी के राम हनुमान के राम सीता के राम शबरी के राम हनुमान के राम
आलू धनिया और मटर टमाटर आज चले सब मेले में। पालक बैंगन गोभी भी बैठ गए सब ठेले में। आलू धनिया और मटर टमाटर आज चले सब मेले में। पालक बैंगन गोभी भी बैठ गए सब ठेले ...
दुश्मन मिटा दूँ मैं आज़म सभी अपने नफ़रत भरी दिल में ही बेशुमार है। दुश्मन मिटा दूँ मैं आज़म सभी अपने नफ़रत भरी दिल में ही बेशुमार है।
खुली हवा में साँस ले बीमारी को दूर भगाएं आओ मिलकर पेड़ लगाएं। खुली हवा में साँस ले बीमारी को दूर भगाएं आओ मिलकर पेड़ लगाएं।
खिलने से गुलशनों में फूल आती हैं बहारें राह भटके हुए राही को दिखाती हैं बेटियाँ। खिलने से गुलशनों में फूल आती हैं बहारें राह भटके हुए राही को दिखाती हैं बेटिय...