STORYMIRROR

Savita Singh

Drama

4.8  

Savita Singh

Drama

एहसास

एहसास

1 min
672


जाने क्या है

सब हैं लेकिन ये अकेलापन !

समझ नहीं आता क्यों ?


कोई ख़्वाहिश ही नहीं

एक शून्य सा

हर शय से मोहभंग

जाने क्या है।


जिसको भी बहुत प्यार किया

उसने ही उतना दुःख दिया

छोड़ मुझे वो चल दिया

कोई दुनिया छोड़ गया।


जाने क्या है

किसी ने मुझे समझा ही नहीं

ये मन कुछ समझने लायक

बचा ही नहीं।



समझाने को सब है

समझने को कोई नहीं !

शायद एक बेकार

बिना काम का सामान !


जाने क्या है,

किसी को जरुरत ही नहीं !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama