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Savita Singh

Romance


4.3  

Savita Singh

Romance


तुम क्यूँ बोले

तुम क्यूँ बोले

1 min 624 1 min 624

तुम अब क्यों बोले

जब पहला सावन आया था

रिमझिम बादल बरसे थे

मन के अरमान तरसे थे

तब तुम क्यों ना बोले थे !

जब सुन्दर चाँदनी रातों में

झर झर हरसिंगार झरे

हरसिंगार के साथ अरमान झरे

तब तुम क्यों ना बोले थे !

जब चाहा तुम्हारा काँधा

अपने दुःख को बिसराने को

जी भर के रो लेने को

तब तुम क्यों ना बोले थे !

जब सीख लिया ख़ुद से ही

अपनी बातें करना ख़ुद रोना

खुद आँसू पी कर हँस देना

अब तुम क्यों बोले ?

क्यों चाहत हुई बातें करने की

क्यों चाहत प्यार जताने की ?

जब मन की गंगा सूख गई

बारिश से भी ना भर पायेगी

फिर अब तुम क्यों बोले ?


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