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Savita Singh

Drama


5.0  

Savita Singh

Drama


मीता

मीता

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मीता !

कुछ शब्द उधार दोगे ?

जिनमें मैं तुम्हें बुनती और गुनती रहूँ

थोड़ी मदद करो न !


कुछ शब्दों के मायने ही बदल दो

या भावशून्य बना दो मुझे !

मैंने तुम्हें मीता कहा

थोड़ा सा निभाओ ना !


मेरे एहसास छीन लो

दर्द के, ख़ुशी के

वाणी के तीरों से घायल होने का एहसास

मुझे रोना बिलकुल नहीं पसंद !


मुझे फूलों पर उड़ती रंग बिरंगी

तितलियाँ बहुत प्यारी लगती

लेकिन छूने से डरती हूँ

उनका रंग हाथ में आ जायेगा

वो दुखी होंगी !

मीता !

मुझे एक पत्थर की शिला बना दो ना !!


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