Manjul Manzar Lucknowi
Drama
माँ कहती है बनो खिलाड़ी
तब फुटबॉल उठाता हूँ।
पिता चाहते थे सो अफसर
बनकर ऑफिस जाता हूँ।
दोनों का हूँ अंश मुझे हर
ख़्वाहिश पूरी करनी है,
दो हिस्सों में बँटा हुआ
दो - दो किरदार निभाता हूँ।
जब भी दीपावली...
इंसान
जिसने पाया वो...
Ghazal..रंग म...
राज़ सारा उगल ...
राष्ट्र कवि र...
तब मेरा लहू उ...
भेड़िया धसान ह...
सामाजिक संवेद...
आग उगलने लगती...
मेरे दिल के झुले में, मैंने तुझ को बैठा दिया। मेरे दिल के झुले में, मैंने तुझ को बैठा दिया।
मेरे रुपये-पैसे लूट गये, कोई बात नही मेरे रुपये-पैसे लूट गये, कोई बात नही
उम्दा कारीगर ने कठपुतली क्या खूब सिली है, उम्दा कारीगर ने कठपुतली क्या खूब सिली है,
दुनिया मे वही हुआ है, आज तक सफल जिसने सही वक्त पर कर्म किया, असल दुनिया मे वही हुआ है, आज तक सफल जिसने सही वक्त पर कर्म किया, असल
धूल ही जमीं रहने दी तेरी यादों की रझाई पर धूल ही जमीं रहने दी तेरी यादों की रझाई पर
साज़ बन जाए ये टूटा हुआ दिल कभी साज़ बन जाए ये टूटा हुआ दिल कभी
जब हिम्मत लड़खड़ाने लगे सफर में, याद रखना, वक्त बदलता है हर पल में, जब हिम्मत लड़खड़ाने लगे सफर में, याद रखना, वक्त बदलता है हर पल में,
दोनों की खूबी डाली बना दिया अर्द्ध दोनों की खूबी डाली बना दिया अर्द्ध
चांदनी हर दिल में आहिस्ता उतरी, किसी ने कविता कह दिया उसे चांदनी हर दिल में आहिस्ता उतरी, किसी ने कविता कह दिया उसे
अपनों की खुशियों में सबसे ज्यादा खुश होने वाला... अपनों की खुशियों में सबसे ज्यादा खुश होने वाला...
रसीले गुलाबी होंठ हैं तेरे, जो मधुर अल्फाज़ सरकाते है, रसीले गुलाबी होंठ हैं तेरे, जो मधुर अल्फाज़ सरकाते है,
ऊपर से माता-पिता उम्मीदों को इतना बोझ आज विद्यार्थी, खुद के भीतर हुआ, जमींदोज ऊपर से माता-पिता उम्मीदों को इतना बोझ आज विद्यार्थी, खुद के भीतर हुआ, जमींदोज
जिंदगी की हकीकत बताती है नींदे जिंदगी की हकीकत बताती है नींदे
अपने कर्म की डोरी के संग उड़ाते रहो, तुम तो बस पतंग अपने कर्म की डोरी के संग उड़ाते रहो, तुम तो बस पतंग
बिना बिजली अब जीवन नहीं, इसकी ज़रूरत अब हर कहीं, बिना बिजली अब जीवन नहीं, इसकी ज़रूरत अब हर कहीं,
ज्ञान की ज्योति जलती है,भीतर तन मां शारदे ध्यान से पाते है,विद्या धन ज्ञान की ज्योति जलती है,भीतर तन मां शारदे ध्यान से पाते है,विद्या धन
कितने ही बहानों की बनाएं, इमारत कामचोर कभी होते नही है, सफल कितने ही बहानों की बनाएं, इमारत कामचोर कभी होते नही है, सफल
मुझे तेरे प्यार की सरिता अमृत सी लगती है, मुझे तेरे प्यार की सरिता अमृत सी लगती है,
मुझ से तुम दूर रहो तो कोई बात नहीं, मगर मेरी रातों का ख्वाब बन जाना, मुझ से तुम दूर रहो तो कोई बात नहीं, मगर मेरी रातों का ख्वाब बन जाना,
मैं शब्दों को कलम में उतारूंगा ओ सनम, मुझे तेरे इश्क की गज़ल लिखनी हैं। मैं शब्दों को कलम में उतारूंगा ओ सनम, मुझे तेरे इश्क की गज़ल लिखनी हैं।