दम तोड़ते रिश्ते
दम तोड़ते रिश्ते
संयुक्त से एकल और एकल से अलग- अलग हो गये,
कुछ इस तरह टूटते-टूटते परिवार अपने- अपने हो गए।।
माँ बाप के अलावा भी अभिभावक होते थे पहले,
मिल जुलकर पीढ़ियाँ रहती थी एक ही छत के तले।।
अब युवा परिपक्व, प्रौढ़ एवं समझदार होकर शादी करते,
शादी की उम्र ही निकल जाती भौगोलिक रूप से कहें।।
हम दो हमारे दो नहीं बस एक ही बच्चा पैदा करते,
आपसी झगड़ो, महत्वाकांक्षाओं से विचार नहीं मिलते।।
रिश्तों में सहनशीलता, समझौता, क्षमा- याचना नदारद रहते,
बात तलाक तक पहुँच जाती तब मसले उग्र रूप लेते।।
अभिभावक तो तलाक अपनी सहूलियत के हिसाब से करते,
पर दो पाटन के बीच फँस जाते अबोध, मासूम बच्चे।।
हद तो ये कि मानसिक तौर पर सब उलझते इस द्वन्द में,
शादी के दशकों के बाद भी सामंजस्य स्थापित ना कर पाते।।
पश्चात्तीयकरण या आधुनिकता कहो अंत हमेशा पक्ष में नहीं होते,
खोखलापन, अनिश्चितता होगी भावी पीढ़ियों के रिश्तों में।।
रिश्तों में दरारों की नींव पर मोहब्बत के मकान नहीं बनते,
खोखली दिल की दीवारों में स्वार्थ के दीमक डेरा डाल देते।।
