shivani j
Tragedy
हाथों में हाथ थामे चलता है,
पर साथ कभी देता नही।
रोज देखे वो चाँद को,
हसीन उसे कभी लगा नही।
बारिश शोर लगती है उसे,
आँखों से बरसे वो पानी।
जिसे कभी खामोशी समझ न आई,
मैं भी दिल उसी से हारी।
क्या ये संभव ...
कहानी वही पुर...
पहेली
दिल
जाना नहीं
कसूर
कोशीश
कौन हूँ मैं ?
ख़्वाब
है वही दिन,रात का रोना। वही दरके हुए गाने, वही रूठा जमाना। है वही दिन,रात का रोना। वही दरके हुए गाने, वही रूठा जमाना।
यह शहर है यह रोने की जगह नहीं है। यह शहर है यह रोने की जगह नहीं है।
एक शिकायत है तुझसे माँ,क्यों मुझे ब्याह दिया विदेस? एक शिकायत है तुझसे माँ,क्यों मुझे ब्याह दिया विदेस?
दूर देश से बेशकीमती,नक्काशीदार पिंजरा मंगवाया। दूर देश से बेशकीमती,नक्काशीदार पिंजरा मंगवाया।
भर जाता तलवार का घाव, शब्दों का नहीं भरता है, शब्दों से मिले ज़ख्मो का, कहांँ कोई मरहम। भर जाता तलवार का घाव, शब्दों का नहीं भरता है, शब्दों से मिले ज़ख्मो का, कहांँ...
तय किया लोमड़ी नहीं छोड़ेगी चाहे जितने उपर लटके दूसरों के लिए खट्टे नहीं छोड़ेगी तय किया लोमड़ी नहीं छोड़ेगी चाहे जितने उपर लटके दूसरों के लिए खट्टे ...
स्वच्छ गगन में विचरण करता हरियाली में सोता हूँ स्वच्छ गगन में विचरण करता हरियाली में सोता हूँ
उसकी कृशकाय काया बड़े-बड़ों की माया तले , दब जाती है, बार बार खींच साँस अंदर, वह रह रह जाती है..अपनी ... उसकी कृशकाय काया बड़े-बड़ों की माया तले , दब जाती है, बार बार खींच साँस अंदर, वह ...
तुमने ही बाँटा कभी हिन्दू कभी मुसलमान में, कभी अबला कभी सबला में, तुमने ही बना दी थी सरहदें और तय कर... तुमने ही बाँटा कभी हिन्दू कभी मुसलमान में, कभी अबला कभी सबला में, तुमने ही बना द...
प्रकृति करीब जाओ जितने अपनी ओर खींचने को आतुर। प्रकृति करीब जाओ जितने अपनी ओर खींचने को आतुर।
तुम बस अपनी सोचो यहां। खुदा किसी का भी ना मोहताज है तुम बस अपनी सोचो यहां। खुदा किसी का भी ना मोहताज है
सर्वाधिक महत्वपूर्ण है पुस्तक का वह पृष्ठ, जहां मुद्रित पुस्तक का अधिकतम खुदरामूल्य। सर्वाधिक महत्वपूर्ण है पुस्तक का वह पृष्ठ, जहां मुद्रित पुस्तक का अधिकतम खुदर...
काव्य कुसुम कानन में कविता, कलुषित हुई कहो कैसे? काव्य कुसुम कानन में कविता, कलुषित हुई कहो कैसे?
कितनी ही कामनाएं मसली है मैंने अपने कोमल हृदय पर खिलखिलाती। कितनी ही कामनाएं मसली है मैंने अपने कोमल हृदय पर खिलखिलाती।
कुदरती विरोध प्राकृतिक विपदा कुदरती विपदा प्रकृति पहल हारा प्रकृति विकाश और जीवन कुदरती विरोध प्राकृतिक विपदा कुदरती विपदा प्रकृति पहल हारा प्रकृति विकाश...
देखो उस पृथ्वी का मानव ने आज यह कैसा हाल किया है? देखो उस पृथ्वी का मानव ने आज यह कैसा हाल किया है?
आज मैं गाँव से लौटा हूँ। मन में गहन पीड़ा लिए बैठा हूँ। आज मैं गाँव से लौटा हूँ। मन में गहन पीड़ा लिए बैठा हूँ।
सपने देखता कि आज आँखें खोल देगा बबुआ झूलेगा उसकी गर्दन से! सपने देखता कि आज आँखें खोल देगा बबुआ झूलेगा उसकी गर्दन से!
सारा परिवेश बदल चुका है अब बदल गया है पड़ोसी...। सारा परिवेश बदल चुका है अब बदल गया है पड़ोसी...।
दुख की चादर ओढ़े कौन खड़ा है वो समय समय का फेर है बदल रहा है जो। दुख की चादर ओढ़े कौन खड़ा है वो समय समय का फेर है बदल रहा है जो।